नवीनता के सतत स्पंदन का नाम है नवलय. नवलय का गठन 9 सदस्यों जो वित्त, उद्योग, सामाजिक कार्य, प्रौद्योगिकी और स्वास्थ्य जैसी विभिन्न विधाओं से आते थे लेकिन इन सब में समाज कल्याण के लिये संगठित प्रयास की प्रतिबद्धता एक समान थी. यद्यपि यह प्रयास 1999 में एक अनौपचारिक स्वरुप ले चुका था नवलय ने 15 मार्च 2000 को स्वयंसेवी संस्था के रूप में पंजीकृत हुआ. समाज के प्रति उत्तरदायित्व एक सहज लेकिन सतत प्रयास होता है और इसके आयाम तारों की संख्या जितने होते हैं. देश को केंद्र में रखकर, समाज हित में संगठित प्रयास के लिये नवलय ने अपना ध्येय वाक्य अत्यंत सरल और स्पष्ट अवधारणा के साथ नियत किया “भला हो जिसमें देश का वो काम सब किये चलो”. यह ध्येय वाक्य सार्थक ऊर्जा और समर्पण का आव्हान है. यह वाक्य प्रतिबद्धता का घोष है. एक अच्छी सोच कार्यरूप में परिणित करने भलाई परोपकार जैसे लचीले शब्दों में वे सारी संभावनाएं निहित हैं जो स्त्रोतों समय और कार्य योजनाओं को अपनाने की स्वतंत्रता को रेखांकित करती हैं.
मोनो किसी भी संस्थान के दर्शन उद्देश्यों और कार्यव्रत का चित्र रूप में प्रकटीकरण होता है जो कालांतर में संस्था की पहचान बनता है। नवलय का मोनो एक केंद्र से प्रारम्भ होता ऐसे वलयों का चित्र है जो अलग अलग रंगों के हैं. 9 सदस्यों की प्रतिबद्धताए समर्पण जो शनः शनः केंद्र से विस्तारित होता है जैसे जल में उठने वाली जीवंत तरंगे जो केंद्र से दूर जाते समय विस्तार को प्राप्त करती हैं. मोनो से स्पष्ट है कि एक केंद्रित विचार से प्रसारित हर वलय विस्तार के नैसर्गिक स्वरुप में उस ऊंचाई तक जाता है जहाँ नवलय का सरल सीधा और सार्थक ध्येय वाक्य भला हो जिसमे देश का वो काम सब किये चलो की ओर बढ़ता है. इस मोनो में गतिशीलता लचीलापन नियंत्रित लेकिन नैसर्गिक विस्तार को प्रदर्शित किया गया है जिसमे संस्था की सम्पूर्ण ऊर्जा ध्येय वाक्य की भावनाये उसमे निहित प्रतिबद्धता की सम्पूर्णता और अनुशासित विस्तार को प्रगट किया गया है. नवलय का अनऔपचारिक गठन अगस्त-सितम्बर 1999 के दौरान ही हो गया था परंतु उस समय इसका स्वरूप एक ही दिशा में कार्य कर रहे उत्साही युवकों की एक टोली के रूप में था । अपने विचारों एवं ऊर्जा को एक निश्चित मार्ग पर अग्रसर करने हेतु इस टोली का औपचारिक गठन कर इसका बाह्यस्वरूप तय करने की दृष्टि से इसे एक पंजीकृत स्वयंसेवी संस्था के रूप में विकसित करना तय हुआ । तद्नुसार 15 मार्च 2000 को यह टोली नवलय के नाम से पंजीकृत हुई । नवलय के अधिकृत उद्देश्यों में यद्यपि कई प्रकार के उद्देष्य शामिल हैं पर इसे यदि एक वाक्य में समझना हो तो नवलय के मोनो एवं इसके बोध वाक्य को देखना पर्याप्त है। नवलय का मोनो एक धुरी में उठती तरंगों का है जो कि निरन्तर बड़ी होती जाती हैं और इस मोनो पर जो ध्येय वाक्य लिखा है वह है “भला हो जिसमें देश का वह काम सब किये चलो” इस तरह वे सभी कार्य जिससे देश का कुछ भी भला होता है वे नवलय के उद्देश्यो में शामिल हैं और नवलय के प्रत्येक कार्य या कार्यक्रम में किसी न किसी प्रकार देशवासियों के प्रति परोपकार की भावना जुड़ी होती है.

